प्रेम

  • प्रेम इस विषय का जितना भी गहन अध्ययन किया जाए।हर बार कुछ न कुछ अद्भुत ही मिलेगा ।स्वयं ईश्वर भी इस अद्भुत अनुभव के लिए इस मर्त्यलोक पर अवतरित हुए लेकिन सम्भभवतः वो भी इस विषय का पर्याप्त ज्ञान नही पा पाए तभी तो उन्हें बार बार इस लोक में जन्म लेना पड़ा । हम राधा कृष्ण जी के प्रेम को स्वयं के प्रेम में ढूढ़ते हैं। हम शिव पार्वती जी को प्रेरणा रूप में देखते हैं ।लेकिन हम ये क्यों भूल जाते हैं कि प्रेम हमने किया हैं तो हम क्यों किसी और के प्रेम से स्वयं के प्रेम की तुलना करें । यदि हम ने प्रेम सच्चे भाव से किया हैं, तो हमे उसके उसके गूढ़ रहस्य का ज्ञान स्वयं होगा।ईश्वर हमे अपने प्रेम द्वारा एक मार्ग दिखाते हैं, उस मार्ग पर चलना या न चलना ये हम पर निर्भर करता है। ये हम पर होता हैं कि हम उसे पा ले या अपनी मूर्खता से उसे गवा दे। सब का प्रेम एक अद्भुत कथा के समान होता हैं। सबके प्रेम में कुछ न कुछ अवश्य होता हैं ।हम स्वयं उस प्रेम के रचयिता भी होते हैं और उसके विनाशक भी।हम स्वयं के प्रेम की पटकथा बहुत अछि भी लिख सकते हैं और बहुत बुरी भी ये हम पर निर्भर करता हैं ।यदि हम चाहे तो राधा कृष्ण जी के प्रेम से भी अद्भुत प्रेम कथा हमारी हो सकती हैं ,परन्तु उस कथा के निर्माण के लिए हमे स्वयं उस प्रेम के प्रति निष्ठावान होना होगा क्यों कि एक अद्भुत प्रेमकथा तब तक अच्छी प्रेम कथा नही होती ,जब तक उस कथा के प्रति आपकी सच्ची और अच्छी निष्ठाभाव नही जोड़ी होती हैं। प्रेम करना आसान हैं परंतु उस प्रेम के प्रति समर्पित भाव रखना। ये सब नही कर पाते तभी तो हम दूसरों के प्रेम की दुहाई देते फिरते हैं। किसी भी कार्य का एक लक्ष्य और उद्देश्य भाव अवश्य होता हैं उसी प्रकार प्रेम भी हमारे जीवन मे एक उद्देश्य लेके आता हैं बस हमे उस उद्देश्य को समझने की देर होती हैं। प्रेम कोई कार्य नही हैं ये हमे पता हैं लेकिन प्रेम अर्थहीन या उद्देश्यहीन कदापि नही होता हैं। वो जीवन मे एक बार आता हैं और जीवन मे बहुत कुछ देके तो बहुत कुछ लेके भी चला जाता हैं परन्तु उसका उद्देश्य अवश्य होता हैं ।जब आपको प्रेम मिलता हैं तब वो आपको ज्ञान की ओर, सम्मान की ओर ,निष्ठा की ओर ,मोक्ष की ओर लेके जाता हैं परंतु जब वो नही मिलता तब इसका अर्थ हैं ।आपने उसके सच्चे उद्देश्य को अब तक नही समझा और व्यर्थ की बातों में अब तक लगे रहे ।यदि प्रेम नही मिलता तो इसका अर्थ ये हैं कि आप कहि न कहि अपने प्रेम ग्रंथ के प्रति सच्चे भाव से नही जुड़े थे कहि न कही आपके निष्ठाभाव में कमी थी ।ईश्वर जैसे हमे अपनी गलतियों के लिए दंड देता है और फिर सही राह भी दिखाता हैं ,वैसे ही प्रेम भी सबको दूसरा मौका अवश्य देता हैं ।वो हमे फिर से एक अद्भुत रचना रचने का अवसर देता हैं । वो हमें हमारे प्रेम को इतिहास मेंजगह दिलाने का एक अवसर जरूर देता हैं बस ये हम पर हैं कि हम अपने प्रेम को किस प्रकार से रचते हैं एक अकल्पनीय ,अद्भुत ,अदिव्य कथा के रूप में या साधरण कथा के रूप में ।
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ढोंगी

  • वैसे तो ये शब्द हम सभी ऐसे बाबा लोगो के साथ ही जुड़ते हैं जिन्होंने लोगो के साथ बुरा किया हो लेकिन दिखवा ,छलावा, आडम्बर,विश्वासघात ये सिर्फ कुछ लोगो तक ही सीमित नही हैं या यूं कहें कुछ गिने चुने लोग ही सिर्फ इस वर्ग में नही आते। इस वर्ग में ऐसे लोग भी आते हैं। जो अच्छाई का मुखौटा ओढे हुए होते हैं।लेकिन असल मे वो सबसे बड़े ढोंगी होते हैं ।जो अच्छाई का चादर ओढ़े बुराई के काले चादर में लिपटे होते हैं । ढोंगी लोगो को तो पहचान पाना शायद आसन हो ,लेकिन ऐसे लोगो को पहचान पाना सबसे मुश्किल काम होता हैं, क्यों कि ये रहते कुछ हैं दिखते कुछ हैं सोचते कुछ हैं ,बोलते कुछ और ही हैं।ये बुराई के चादर में लिपटे ऐसे प्राणी होते हैं ।जिनको हम शायद पहचान कर भी अच्छे से पहचान न पाए क्यों कि वो अच्छे होने के दावा जो करते रहते हैं। ऐसे लोग लोगो को असल रूप से बरगलाते हैं । इन की पहचान कर पाना बहुत ही मुश्किल होता हैं ।ये लोगो को वो रूप दिखाते हैं जो ये असल मे होते नही हैं, लेकिन अपना वो रूप छिपाते हैं जो वो होते हैं। ये आपके हमारे जैसे सामान्य से दिखते हैं या दिखावा करते हैं।ये बड़े बड़े काम करने का दावा करते हैं और कर के समाज को ये संदेश देते हैं कि हम से अच्छा कोई नही। ये समाज मे व्याप्त उन बुरे लोगो से भी ज्यादा ही बुरे होते हैं जो कहते तो हैं कि हम बुरे हैं और वो अपने काम से अच्छे और बुरे होने का बता देते हैं ,लेकिन ये लोग खुद को अच्छा अच्छा कहते कहते बुरा कर जाते हैं लेकिन लोगो को पता भी नही चलता।इनकी पहचान तब होती हैं जब ये कुछ ऐसा कर जाते हैं ।जो ये छिपाना चाहते हैं लेकिन वो छिपा नही पाते ।कहते हैं ना बुराई लाख छुपाये नही छुपती एक न एक दिन सामने आ ही जाती हैं।आज के समय मे व्यक्ति की सही पहचान कर पाना बहुत ही मुश्किल काम हो गया हैं क्यों कि अच्छा और सच्चा होना उसके अछे व्यक्तिव की प्रमाणिकता नही कहि जा सकती क्यों कि आज अच्छे वही हैं जो सच मे बुरे हैं ,क्यों कि उन्होंने एक आडम्बर सा बना रखा होता हैं अच्छे और सच्चे होने का।इसलिए अच्छा होना सिर्फ काफी नही वास्त्विक रूप से अच्छा और सच्चा होना जरूरी हैं।

लुकाछिपी

उज्वल आकाश मंडल में आते जाते बादल , ऐसा लगता है कुछ बच्चो का झुंड सा हो जो एक दूसरे से दौड़ लगा रहे हो एक दूसरे को पीछे छोड़ने के चक्कर में, कुछ गिरते, कुछ पड़ते ,कुछ उठते ,कुछ समहलते । कही दूर निकलने के चाह में बार बार गिरते समहलते ,फिर भी आगे बढ़ते ।गिरने पर हस्ते लेकिन पीछे होने पर रोते कुछ कर जाने की चाह में एक दूसरे को पीछे करते चले जाते। बस दूर निकलना है लेकिन शायद पता नहीं कहां लेकिन निकल ना तो हैं ये पता है ना मासूम नन्हे नन्हे कदमों से आगे बढ़ते लेकिन मन में एक अजीब सी खुशी कुछ पाने की जो बहुत ही सुंदर होगा। जो बहुत ही निराला होगा ।कुछ ऐसा होगा जो अकल्पनीय होगा ,कुछ तो होगा प्यार सा ख़ूबसूरत सा ।ये सोच उन्हें शायद थकने नहीं देती ये सोच की वो कुछ पा लेंगे वहीं काफी हैं। जब वो इस सोच से आगे बढ़ते हैं और गंतव्य तक पहुंचते हैं तो कुछ अलग ही खुशी होती है जिन्हे शायद शब्दों में व्यक्त कर पाना सम्भव नहीं वो तो बस अनुभूति के लिए ही हैं जो चन्द लफ्जो में समेटा नहीं जा सकता । कुछ पा लेने की अनुभूति अभिव्यक्त नहीं हो पाती वो तो बस अनुभव की जाती है ।

सबक

  • जीवन में आप कुछ अच्छे लोगो से मिलते हैं ,तो कुछ बुरे, तो कुछ बहुत ही बुरे लोगो से ,लेकिन क्या आपने ये अनुभव किया हैं ।ये बुरे लोग ही , हमारे जीवन के सबसे बड़े सीख के पथप्रदर्शक होते हैं।ये जीवन में आते ही इसलिए हैं की वो हमारे लिए कुछ अच्छा कर सके, लेकिन हम ही हैं ,जो इस गूढ़ रहस्य को जान नहीं पाते । आप सोचते होगे ,ये कुछ बुरे तो कुछ बहुत बुरे में क्या अंतर है। अंतर कुछ खास नहीं है ,बस सोच का हैं। कुछ बुरेऐसे लोग होते हैं ,जो जीवन में आपको थोड़ा प्रभावित करते हैं, लेकिन कुछ ऐसे होते हैं ,जो आपके जीवन को और आपकी अंतर आत्मा को बहुत ही प्रभावित कर जाते हैं ,वो आपकी आत्मा को चोट पहुं चाते हैं। वो आपको अपने क्रिया द्वारा इतना दुखी कर जाते हैं कि आप अपने जीवन से हार से जाते हैं ।आपको ये सोचने पर विवश कर देते हैं कि ऐसा हुआ तो क्यों हुआ या हुआ भी तो आपके साथ ही क्यों हुआ। ऐसा आपने क्या किया ,जो ये सब आपके साथ ही हुआ और ना जाने क्या क्या। अगर आप सोचे और खुद से ये प्रश्न करे की, हमने अपना समय जो उस व्यक्ति को समझने में लगा दिया ।उस समय को हम खुद पर लगाते तो आज खुद पर अफसोस नहीं कर रहे होते ।वैसे हमारे जीवन में जो कुछ भी होता हैं वो पुरवनिर्धरित होता है और उसके पीछे एक बहुत बड़ा कारण भी होता हैं ।जीवन में कुछ सीख होती हैं, जो हम ऐसे लोगो से सीखते हैं।जीवन का वो ज्ञान जो शायद हम स्कूल में नहीं, ना अपने मां बाप से सीख पाते हैं ,उस ज्ञान का ज्ञान हम ऐसे लोगो से ही सीखते हैं और वो सीख जीवन की सबसे बड़ी और अच्छी सीख होती हैं ,वो जीवन में आगे बढ़ने की सीढ़ी होती है । जो हमे ये सीखाती हैं कि जीवन में आपने क्या किया ये महत्त्व नहीं रखता ।आपने क्या सीखा और सीख कर कितना समझा और उस सीख पर कितना अमल किया ये जादा महत्त्व रखता है,आपने वो तो नहीं किया ,जो आपके साथ हुआ क्यू की उस व्यक्ति ने सीख तो इसीलिए दिया था ।ना कि आप किसी के साथ वो ना करे और उसको वो दुःख ना दे, जो आपने सहा ,अनुभव किया।जीवन में मिले अच्छे या बहुत बुरे लोगो के सोच के साथ उनकी क्रिया में भी अंतर होता है ,जो थोड़े बुरे होते हैं ,
  • वो अनजाने में वो कर जाते हैं।लेकिन जो बहुत बुरे होते हैं वो जान बूझकर आपको दुखी करते हैं और अंतरात्मा को जखजोर कर रख देते हैं।लेकिन कहते हैं ना जो होता है वो अच्छे के लिए ही होता है या जो होगा वो भी अच्छा होगा बस फर्क तब पड़ता है ,जब आप उस से कुछ सीखते नहीं है और वही गलती दूसरे के साथ कर जाते हैं। जीवन में आप सबसे बड़ी सीख किसी अपने से ही सीखते हैं। ये भी जीवन का सबसे बड़ा कटु सत्य है।

सारगर्भित लेख

जब आप कुछ लिखते हैं ।तब आप केवल लिखते हैं ।आपको अपने विचारों को शब्दों में प्रकट करना होता हैं। आप उन ख्यालो को शब्द देते हैं ,जिनको आपने महसूस किया होता हैं। आप एक अनुभव को अपने अभिव्यकिति रूप देते हैं ।जिस विचार से आप प्रभावित हुए होते हैं, उसे आप एक आकार देते हैं।आप उस भाव, उस विचार को कागज के पन्नो पर लिखते हैं जिनको आपने अपने अंतर मन मे महसूस किया हैं । आप एक लेख नही लिखते आप तो बस आपने जो अनुभव किया हैं उनको शब्द देते व आकार देते हैं। लिखना हमारी अनिवार्यता नही होती ,लेकिन हम जब कुछ महसूस करते हैं या उस से प्रभावित होते हैं ,तो हम या तो उसे बोलकर किसी प्रिय से व्यक्त कर देते हैं या फिर उसे शब्दों की माला का एक रूप दे देते हैं ।हम कागज के पन्नो पर कुछ बनावटी नही लिखते हम तो केवल अपने अनुभवों को साझा करते हैं सब से ।प्रकटीकरण का भी सबका अपना अपना तरीका होता हैं कोई बोल कर करता हैं कोई लिख कर करता हैं और कोई जताकर करता हैं कि हा आज मैने ये अनुभव किया या इस ख्याल ने मेरे अंतर मन को झकझोर के रख दिया।जब आप अपने ख्यालो को एकसुंदर रूप देते तब आप एक नए लेखक को जन्म देते हैं, वैसे तो सब के अंदर एक कवि ,लेखक होता हैं ,लेकिन बस कुछ लोग ही अपने आप को समाज के समक्ष प्रस्तुत कर पाते हैं। जरूरी नही की जो हम लिखे वो सारगर्भित हो ,उसका कुछ अर्थ ही निकले या वो तार्किक हो लेकिन हा उस मे हमारे निच्छल भाव जरूर हो ये आवयश्क हैं क्यों कि अभिव्यक्ति का सबसे अच्छा माध्यम यही हैं ।जरूरी नही की आप सबके लिए लिखे जरूरी ये हैं आप अपने संन्तुष्टि के लिए लिखे ।आप अपने छिपे उस कवि ,उस लेखक के लिए लिखिए जिसको ये लगे कि हा आज मैने अपने अनुभवों को एक सुंदर और अनोखा रूप दिया ।उस आत्मसंतुष्टि के लिए लिखे जो आपको लिख कर होती है। कुछ न लिखने से कुछ लिखना ज्यादा अच्छा होता हैं ।सबके भीतर एक लेखक बसता है, हो सकता हो वो बहुत अच्छा हो या फिर कुछ कम अच्छा हो लेकिन मन और विचार से तो वो अपने आप मे ही एक पुरोधा होता हैं।समाज को कुछ देने से पहले ये आवयश्क हैं कि हम स्वयं को क्या दे रहे हैं । वैसे ये भी आवयश्क हैं कि हम कुछ ऐसा भी न लिखे ,जिस से किसी के मान की क्षति हो या उसके के दुःख का कारण न बने ,क्यों कि एक लेखक और कवि की समाज मे कुछ भूमिका होती हैं या स्वयं में भी उसके कुछ कर्तव्य होते हैं जिनका निर्वहन उसको करना होता हैं।इसलिये अपने भीतर छिपे हुए विचरो के प्रकटी करण के लिए अपने उस लेखक को जगाये और शब्दों ,अक्षरों, वर्णो की अद्भुत दुनिया मे खो जाए।

व्यथा

आज मन उदास सा है मन में एक व्यथा सी हैं ।शब्द नहीं उस व्यथा को व्यक्त करने के लिए आखिर इस टूटे मन से क्या बोल पाएंगे विचार आज शब्दहीन से हो गए हैं ।मन में बस हैं तो केवल दुःख हैं कुछ कहना है लेकिन ये शब्द जो हैं आते ही नहीं ये विचार रूप में प्रकट होने को राज़ी ही नहीं होते ।मन में एक अजीब सी उदासी हैं विचारो की शब्दों की अक्षरों की ।मन कुछ कहना तो चाहता है लेकिन कहता नहीं वो विचारशील तो हैं लेकिन शब्दहीन । अगर शब्द हैं तो विचार नहीं मन नहीं क्यों की टूटे मन से क्या बोले क्या कहे पता नहीं कुछ मन नहीं होता कहने को ।बस हैं तो एक विराम जिस का कोई अंत नहीं ।

दिल टूटना

आज मैंने जाना दिल टूटना क्या होता है वो तकलीफ क्या होती

आज मन ने वो तकलीफ को शहा जिस तकलीफ को सुना था

आज उस तकलीफ को महसूस किया जिस तकलीफ से दूसरों को कभी गुजरते देखा था और ये हस कर कहा था ।क्या प्यार में लोग इतने भी पागल होते हैं? आज आंखो से बादल की तरह आंसू को देखा जो दिल टूटने पर खुद बा खुद आ जाते हैं।आज दिल में उस तकलीफ को महसूस किया जो बहुत ही असहनीय होता है ।आज जाना की प्यार में हार क्या होती हैं । खोने का दुख़ क्या होता है।शब्द नहीं हैं कुछ बोलने को ।आज जाना शब्द हिन होना क्या होता है। ईश्वर ने प्रेम क्यों बनाया ये सवाल खुद से पूछते हुए खुद को देखा।आज जीवन में सारहीन ता को समझा ।आज जीवन का बहुत बड़ा सबक सीखा।